Wednesday, January 9, 2008

अमेरीका चुनाव २००८ और नारी की दावेदारी

अमेरीका के अगले सदर का चुनाव सर पर हैं । चुनावी क्स्रते पूरी रंगत के साथ परवान चढ़ रही हैं हजारो चुनावी मुद्दे हवाओ मे तैर रहे हैं .जो सबसे ज्यादा चर्चा मे हैं, उन मे सबसे अजीब मुद्दा हैं की "सदर के पद पर बैठने के लायक एक नारी हो सकती हैं या नही "? अगर यही बहस कही दूसरे देश मे चलती तों शायद "अमेरीकी जनमत उस बहस के मुद्दे से ही असहमत होता " , पर अमेरीका मे चल रही यह बहस पूरे संसार के लिए कौतुक इसलिए भी हैं की यह बहस उस देश मे चल रही हैं जहा का समाज और कानून नारी को पूरा मान और बराबरी देने का दावा करता हैं जोएक तरह से सच भी हैं ।पर जहा की औरते बगैर तनाव के समाज , देश ,संसार के कदम से कदम मिला कर चलती हो , हर तरह की जबाबदेही का बोझ बखूबी उठा सकती हो और उठा भी रही हो । उस देश मे जहा की औरते "सैली से सुनीता " तक धरती तों दूर आसमानों मे भी अपने देश की बुलंदी के झंडे बुलंद कर चुकी हो , पहले और दूसरे महायुद्ध के समय ही अपनी सेवा और चतुराई का लोहा मनवा चुकी हो, और सोने पर सुहागा यह कि , मैदान चाहे खेल का हो या कूटनीति का हर जगह अमेरीकन औरतो के जौहर के परचम लहरा रहे हो , उस देश मे किसी पद को लेकर सवाल उठे कि , नारी इस पद के लायक हैं या नही तों अचरज होना ही हैं !
मुद्दे तों चुनाव मे उठा ही करते हैं और बहुत हद तक उनका असर और रंग भी चुनाव के नतीजे पर नजर आता हैं पर " नर --नारी की समानता और हक़ को बहुत ही मजबूती से मानने और हवा " देने वाले देश मे उठा , यह मुद्दा कई मानो मे अलग हैं --खासतौर से तब - जब , यूरोप की लौह महिला मार्गरेट थैचर , पूरब की ताकतवर नारी मरहूम - इंदिरा गांघी और संसार मे मानवीय सेवा और कुर्बानी के लिए मशहूर मदर टेरेसा की मिसाले सामने हो और खुद अमेरीकी औरतो की तूती हर जगह बोल रही हो ऐसे हालत मे ऐसे मुद्दे और बहस उठ्ना अपने --आप मे संकेत हैं कि :------
अमेरीका के मतदाता इस बार बदलाव की राह पर हैं ।
२/नर , सत्ता की लगाम अपने हाथो मे थामे रहना चाहता हैं और समय के बदलाव के अंदेशे से भयभीत हैं ।
३/नारी की आजादी और ताकत अब नर समाज की जगह लेने पर आमादा हैं ।
४/अमेरीका मे औरतो को पूरी आजादी ,हक़ , मान और बराबरी देने के बाबजूद नर समाज , अंदर से इससे सहमत नही हैं और बदलाव की धारा को रोकना चाहता हैं ?
५/ नर और नारी उम्मीदवार एक दूसरे की काट के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रहें हैं ।
६/ तख्त और ताज की राजनीती एक बेमानी बहस की जननी हैं ।जो अन्य ज्वलंत मुद्दों की सचाई की ओर जनता को जाने देने से रोकना चाहती हैं।
२००८ के अमेरिकन सदर के चुनाव मे नतीजा तों मतदाता तय करेगे पर यह भी तय हैं की इस चुनाव के बाद भी नर--नारी पर बहस थमेगी नही ,और इस बहस का और इसके नतीजे का एक गहरा असर , अमेरीका को पसंद करने वाले देशो मे देखने को मिलेगा और नर -नारी भेद की बहस नये मुकाम पर पहुचेगी । सच यह भी हैं की समाज और सभ्यता समय के साथ बदलती आयी हैं पर ये कोई नही कह सकता हैं कि , यही बदलाव का अंत हैं और सच ये भी हैं की बगैर परखे यह नही जाना जा सकता की यह सोना हैं या पीतल । जो भी हो अमेरीकी चुनाव का यह मुद्दा सालो - साल बहस और उदाहरण का मुद्दा बना रहेगा और आने वाले समय मे अमेरीका को नयी रंगत देने मे कामयाब होगा ।

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