Wednesday, October 15, 2014
Friday, August 22, 2014
दिए हौसले के
हयाते गुमशुदा ने फिर पुकारा मुझे अभी
फिरना है दर बदर और ,आवारा मुझे अभी
जिस्म में बाकी है जां रूह अभी जिंदा है
लज्जते गम से होने दे आश्कारा मुझे अभी
राख होने न पाए , आतिशाकुदह सारे
सुलगाना है हर बुझता शरारा मुझे अभी
चाहे लाख हो कोशिश ,मिटने दूंगा न उम्मीदे
ज़वाल जिंदगी का ऐसा, नहीं गवारा मुझे अभी
जलाए रखो दिए हौसले के ,दिल में अभी
तारीकियों से मिला है ये ,इक इशारा मुझे अभी
Sunday, July 6, 2014
मंज़िल थी बेनिशाँ
वही ज़िस्तेंसोराब है वही तिश्ना कारवाँ
प्यास बुझी कभी न बदला कभी समां
सफर था सब्रतलब हमराही थे नातवाँ
ठेस लगी ज़रा और सभी घबरा गए यहाँ
गुमनाम रास्ते थे , मंज़िल थी बेनिशाँ
जोशी जुनूँ में भटकते रहे जाने कहाँ कहाँ
ख्वाहिशें बेहिसाब थी , कविशें थी कम
शायद इसलिए ही नामुकम्मल रहा जहाँ
जावेद उस्मानी
--
प्यास बुझी कभी न बदला कभी समां
सफर था सब्रतलब हमराही थे नातवाँ
ठेस लगी ज़रा और सभी घबरा गए यहाँ
गुमनाम रास्ते थे , मंज़िल थी बेनिशाँ
जोशी जुनूँ में भटकते रहे जाने कहाँ कहाँ
ख्वाहिशें बेहिसाब थी , कविशें थी कम
शायद इसलिए ही नामुकम्मल रहा जहाँ
जावेद उस्मानी
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Wednesday, April 30, 2014
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