दिए हौसले के
हयाते
गुमशुदा ने फिर पुकारा मुझे अभी
फिरना है दर बदर और ,आवारा मुझे अभी
जिस्म
में बाकी है जां रूह अभी जिंदा है
लज्जते गम से होने दे आश्कारा मुझे अभी
राख
होने न पाए , आतिशाकुदह सारे
सुलगाना
है हर बुझता शरारा मुझे अभी
चाहे
लाख हो कोशिश ,मिटने दूंगा न उम्मीदे
ज़वाल
जिंदगी का ऐसा, नहीं गवारा मुझे अभी
जलाए
रखो दिए हौसले के ,दिल में अभी
तारीकियों
से मिला है ये ,इक इशारा मुझे अभी
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